हर उम्र के लिए कहानियाँ: बाल, जिज्ञासु और शिष्य
हर उम्र में वही देवी-देवता थोड़ी और गहराई के साथ लौटते हैं: पहले प्यारे साथी बनकर, फिर अपनी कहानियों के ज़रिए, फिर उन कहानियों के अर्थ के ज़रिए।
बाल: 2 से 3 साल
चित्रों वाली, सुनने के लिए बनी एक से तीन मिनट की छोटी कहानियाँ, बड़े अक्षरों और कोमल आवाज़ में। माता-पिता पास रहते हैं, अक्सर सोते समय या पूजा के दौरान।
जिज्ञासु: 3 से 6 साल
ढेरों सवालों की उम्र। पूरी कहानियाँ, साथ-साथ पढ़ने की हाइलाइटिंग के साथ, और “क्यों” वाले छोटे पड़ाव जो बच्चे को हमेशा उसी पन्ने पर लौटा लाते हैं।
शिष्य: 6 से 10 साल
किस्तों में महाकाव्य, नैतिक दुविधाएँ और मंत्र के हर शब्द का अर्थ। स्क्रीन शांत और थोड़ी बड़ी उम्र के हिसाब से है, ताकि बड़े बच्चों को यह बचकाना न लगे।
न कुछ ज़्यादा, न कुछ बहुत आसान
हर पड़ाव पर कहानी का संदर्भ और लहजा बच्चे की उम्र के हिसाब से होता है। देखें दादी का वादा और बच्चों की सुरक्षा, या कहानियों से शुरू करें।